गुरु तेग बहादुर जी की गुरुगद्दी का इतिहास और बाबा बकाला का सच
सिख धर्म के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी ( बाबा बकाला) के गुरुगद्दी पर विराजमान होने के इतिहास गुरु हरकृष्ण साहिब जी का वचन: आठवें गुरु, श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी ने ज्योति जोत समाने (संसार त्यागने) से पहले संगत को वचन दिया था कि उनके अगले गुरु 'बाबा बकाला' गांव में मिलेंगे। बकाला में नकली गुरुओं का तांता: जब सिख संगत बकाला गांव पहुंची, तो वहां 22 नकली गुरु अपनी-अपनी गद्दियां लगाकर खुद को असली गुरु बता रहे थे। इनमें बाबा धीरमल (सातवें गुरु के बड़े भाई) भी शामिल थे, जिनके पास 'आदि ग्रंथ' होने के कारण लोग भारी चढ़ावा चढ़ाते थे। गुरु तेग बहादुर जी का एकांत जीवन: गुरु तेग बहादुर जी बकाला गांव में अपनी माता नानकी जी और पत्नी माता गुजरी जी के साथ रहते थे। वे 26 साल तक एक छोटे से अंधेरे कमरे (भोरा साहिब) में बिना किसी मान-सम्मान या लोभ के सिर्फ प्रभु भक्ति में लीन रहते थे। मक्खन शाह लुबाना की अरदास: मक्खन शाह नाम का एक अमीर व्यापारी जब समुद्री तूफान में फंस गया, तो उसने गुरु घर से अपने जहाज की रक्षा की अरदास की और सुरक्षित बचने पर 500 मोहरें भेंट करने की मन्नत मां...