पानी की लड़ाई: कल की प्यास या आज की ज़िम्मेदारी?
पानी की लड़ाई: कल की प्यास या आज की ज़िम्मेदारी? " तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा "—यह बात हमने कई बार सुनी है, लेकिन अब यह सिर्फ एक डरावनी भविष्यवाणी नहीं, बल्कि हमारे दरवाज़े पर दस्तक देती एक कड़वी सच्चाई है। " पानी की लड़ाई " आज देशों की सीमाओं पर नहीं लड़ी जा रही, बल्कि यह हर रोज़ शहरों की कॉलोनियों, गांवों के कुओं और पानी के टैंकरों की लंबी कतारों में लड़ी जा रही है। क्या है इस लड़ाई की ज़मीनी हकीकत? हम उस दौर में जी रहे हैं जहाँ नदियां सिमट रही हैं और ज़मीन के नीचे का पानी (Groundwater) खतरनाक स्तर तक नीचे जा चुका है। गर्मियों के आते ही शहरों में पानी के टैंकरों के पीछे दौड़ते लोग एक आम दृश्य बन गए हैं। कई इलाकों में खेती के लिए पानी नहीं है, जिससे किसानों का संघर्ष दोगुना हो गया है। हम तकनीकी रूप से तो बहुत आगे बढ़ गए हैं, लेकिन प्रकृति के इस सबसे अनमोल संसाधन को सहेजने में हम लगातार पिछड़ रहे हैं। यह लड़ाई किसकी है? यह लड़ाई सिर्फ सरकारों या प्रशासन की नहीं है। यह हम सब की है। जब हम अपनी गाड़ी धोने के लिए या ब्रश करते समय नल खुला छोड़कर बेतहाशा पानी बहात...